महाभारत

महाभारत महाकाव्य में तीर भी बाते किया करते थे |

1. क्या कोई तीर बात भी कर सकता है ?
क्या तीर भी किसी से बात कर सकते है ? यह प्रश्न ही अपने आप में रोमाचक है, क्योंकि भला एक तीर कैसे बात कर सकता है ?
लेकिन यहाँ पर आप जानेगे की, एक तीर भी बात किया करता था |
यह बात द्वापरयुग युग से जुडी हुई है, की कोई तीर लक्ष्य के भेदने या इससे पहले बात किया करता था | तो इसका जवाब है, जी हाँ |
तो आज के इस लेख में आप इसी के बारे में जानेगे की यह घटना द्वापरयुग युग में किसके साथ घटी थी |


♥ महाभारत महाकाव्य से जुडी लेख के मुख्य बिंदुओ... mahabharat
1. क्या कोई तीर बात भी कर सकता है ?
2. यह वाक्य कब घटित हुई थी ?
3. कर्ण की महानता के तथ्य क्या है ?

2. यह वाक्य कब घटित हुई थी ?


द्वापर-युग में महाभारत युद्ध के दौरान की बात हैं, कौरवों और पांडवों में युद्ध चल रहा था। कर्ण, अर्जुन को मारने की शपथ ले चुके थे। कर्ण लगातार बाणों की बारिश कर रहा था |
यह देख भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन का रथ जमीन में नीचे झुका दिया।
कर्ण का एक तीर, अर्जुन के मुकुट को हटाते हुए चला गया। अचानक वह तीर लौटकर कर्ण के तरकश में वापिस आ गया।
यह देख कर्ण को आश्चर्य हुआ। तीर ने कहा, ‘हे कर्ण! तुम अगली बार ठीक से निशाना लगाना।’ कर्ण, तीर को बोलते देख हैंरान था। कर्ण ने तीर से पूछा, ‘आप कौन हैं?’तो तीर का जवाब था, की, ‘मैं साधारण तीर नहीं हूं। मैं महासर्प अश्वसेन हूं।

एक बार अर्जुन ने खांडव वन को अग्नि से जला दिया था। जिससे मेरा पूरा परिवार जलकर मर गया। अतः मैं अर्जुन से बदला लेना चाहता हूं ।
’कर्ण ने कहा, ‘मित्र मैं तुम्हारी भावना की कद्र करता हूं परन्तु यह युद्ध मैं अपने पुरुषार्थ से जीतना चाहता हूं।
अनीति की विजय के बजाए मैं नीति के साथ लड़ते हुए मर जाना ज्यादा उत्तम समझता हूं। shankar bhagwan
’ महासर्प अश्वसेन( तीर) कर्ण की प्रशंसा करता हुआ बोला, ‘हे कर्ण वास्तव में तुम धर्म में प्रतिष्ठित हो। तुम्हारी कीर्ति उज्जवल रहेगी।’

3. कर्ण की महानता के तथ्य क्या है ?


कर्ण की नीति और धर्म ही वह गुण हैं जो उन्हें महाभारत के महानायकों की सूची में लाता हैं।
लक्ष्य की पूर्णता के लिये संकल्पित होने के बावजूद धर्म के साथ समझौता न करनी ही सच्ची वीरता हैं। ऐसा ही वीर संसार को नई दिशा देता हैं।
historical temple of mahabhart
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