भूगोल विषय की जानकारीयाँ

1. भूगोल की परिभाषा क्या है ?

भूगोल शास्त्र यह एक ऐसी विषय है, जिसके द्वारा पृथ्वी के ऊपरी स्वरुप और उसके प्राकृतिक विभागों जैसे पहाड़, महादेश, देश, नगर, नदी, समुद्र, झील, डमरुमध्य, उपत्यका, अधित्यका, वन आदि का ज्ञान होता है।
प्राकृतिक विज्ञानों के निष्कर्षों के बीच कार्य-कारण संबंध स्थापित करते हुए पृथ्वीतल की विभिन्नताओं का मानवीय दृष्टिकोण से अध्ययन ही भूगोल (Geography) का सार तत्व है ।
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♥ भूगोल विषय लेख के मुख्य बिंदुओ...
1. भूगोल की परिभाषा क्या है ?
2. भारत की स्थिति और इसका विस्तार क्या है ?
3. इसका नामकरण कैसे हुआ ?
4. भूगोल मानवीय ज्ञान की वृद्धि में कितने प्रकार से सहायक होता है ?
5. भूगोल के प्रारम्भिक विकास का श्रेय किसे जाता है ?

2. भारत की स्थिति और इसका विस्तार
भारत चार- कोणों से बना हुआ आकृति वाला देश है, भारत, दक्षिण एशिया के मध्य में स्थित है |
इसके पश्चिम में अरब प्रायदीप स्थित है | तथा पूर्व के तरफ में इंडोनेशिया - चीन प्रायदीप स्थित है |
यह देशांतरिय द्रष्टि- कोण से पूर्वी गोलार्द्ध के मध्यवर्ती स्थिति में है | और अक्षांशीय द्रष्टि-कोण से उत्तरी गोलार्द्ध का देश है |

भारत का अक्षांशीय एवं देशांतर विस्तार में लगभग 30 डिग्री अंतर पाया जाता है. उत्तर- दक्षिण दिशा में इसकी कुल लम्बाई 3214 किलोमीटर है,
इसका देशांतरीय विस्तार कच्छ के रण शुरू होता है, और अरुणाचल प्रदेश में जाकर अंत होता है, तथा पूर्व - पश्चिम दिशा में इसकी कुल चौड़ाई 2933 किलोमीटर है |
विषुवत व्रत के समीप स्थित भारतीय के कई क्षेत्रों में दिन और रात की अवधि में ज्यादा से ज्यादा 45 मिनट का अंतर देखा गया है,
लेकिन उत्तरतम सीमा के पास में यह अंतर 5 घंटे तक का हो जाता है |

पृथ्वी 24 घंटे में अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व दिशा की और 360 डिग्री देशांतर पर घूम जाती है,
और इस प्रकार से अगर यह मालूम किया जाये की 1 मिनट में पृथ्वी को कितना समय लगता है,
तो इसका जवाब.. यह है की, 1 डिग्री देशांतर पार करने के लिए पृथ्वी को 4 मिनट का समय लगता है |
और इस समय के अंतर की इस कमी से निजात पाने के लिये अन्य सभी देशों की तरह ही भारत ने भी एक मानक मध्यान्ह रेखा का चुनाव किया है |
और यह मानक मध्यान्ह रेखा पर जो स्थानीय समय प्रदर्शित होता है, उस समय को देश का मानक समय कहा जाता है |
विश्व के सभी देशों में आपसी समझ होने के अंतर्गत मानक याम्योत्तर को 7 डिग्री आधे घंटे यानि की 30 मिनट देशांतर के गुणांक पर चुन लिया जाता है,
और यही वह कारण है, जिससे की 82 डिग्री जो की 30 मिनट (Half hour) पूर्वी देशांतर रेखा को भारत देश की मानक याम्योत्तर चुना लिया गया है |
उतर प्रदेश राज्य के इलाहबाद शहर के निकट मिर्जापुर से गुजरने वाली 82 डिग्री 30 मिनट पूर्वी देशांतर को भारत का समय मान लिया गया है |
जो की देशांतर भारत के 5 राज्यों से होकर गुजरती है | वे सभी पांच राज्य इस प्रकार से है... उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा तथा आंध्र प्रदेश |
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3. इसका नामकरण कैसे हुआ ?
मनुष्य अपने इच्छा के अनुसार पर्यावरण में किसी भी प्रकार का परिवर्तन करने के लिये सक्षम है,
तथा मनुष्य वे सभी प्राकृतिक संसाघनों को अपने इच्छा के अनुसार इस्तेमाल कर सकता है,
और यदि भूगोल के नामकरण के विषय तथा इस विषय को सजाने/व्यवस्थित रूप देने का कार्य यूनान के निवासियों ने किया है |
वैज्ञानिक हिकेटियस को भूगोल का जनक माना जाता है,
भूगोल (Geography) शब्द दो शब्दों भू यानि पृथ्वी और गोल से मिलकर बना है।
पृथ्वी की सतह पर जो स्थान विशेष हैं उनकी समताओं तथा विषमताओं का कारण और उनका स्पष्टीकरण भूगोल (Geography) का निजी क्षेत्र है।

4. भूगोल मानवीय ज्ञान की वृद्धि में कितने प्रकार से सहायक होता है ?
भूगोल मानवीय ज्ञान की वृद्धि में तीन प्रकार से सहायक होता है, और वे निम्नलिखित प्रकार से है..
1. विज्ञानों से प्राप्त तथ्यों का विवेचन और विचार करके मानवीय वासस्थान के रूप में पृथ्वी का अध्ययन किया जाता है।
2. और अन्य विज्ञानों की मदद से विकसित धारणाओं में समाहित तथ्य की परीक्षा का अवसर प्रदान करता है, इशलिये की भूगोल उन सभी धारणाओं का स्थान विशेष प्रकार प्रयोग कर सकता है।
3. यह सार्वजनिक अथवा निजी नीतियों के निर्धारण में अपनी महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि प्रदान करने का काम करता है, जिसके आधार पर समस्याओं का स्पष्टीकरण और सुविधाजनक हो जाता है।

सर्वप्रथम प्राचीन यूनानी महान विद्वान इरैटोस्थनिज़ ने भूगोल (Geography) को धरातल के एक विशिष्ट विज्ञान के रूप में मान्यता दी।
इसके बाद हिरोडोटस तथा रोमन विद्वान स्ट्रैबो तथा क्लाडियस टॉलमी ने भूगोल को सुनिश्चित इतिहास स्वरुप प्रदान किया।
इस प्रकार भूगोल में ‘कहाँ’ ‘कैसे ‘कब’ ‘क्यों’ व ‘कितनें’ प्रश्नों की उचित वयाख्या की जाती हैं।
भूगोल (Geography) एक प्राचीनतम विज्ञान है और इसकी नींव प्रारंभिक यूनानी विद्वानों के कार्यों में दिखाई पड़ती है।
भूगोल (Geography) शब्द का प्रथम प्रयोग यूनानी विद्वान इरेटॉस्थनीज ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में किया था।
भूगोल (Geography) की अध्ययन विधि परिवर्तित होती रही है। प्रारंभिक विद्वान वर्णनात्मक भूगोलवेत्ता थे।
बाद में, भूगोल (Geography) विश्लेषणात्मक भूगोल के रूप में विकसित हुआ। आज यह विषय न केवल वर्णन करता है, बल्कि विश्लेषण के साथ-साथ भविष्यवाणी भी करता है।
आरंभिक प्रमाणों के अनुसार इस समय के विद्वान मानचित्र निर्माण और खगोलीय मापों द्वारा पृथ्वी के भौतिक तथ्यों को समझते थे।
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5. भूगोल के प्रारम्भिक विकास का श्रेय किसे जाता है ?
भूगोल (Geography) में आरंभिक विद्वान देने का श्रेय यूनान को ही जाता है, जिसमें प्रमुख थे होमर, हेरोडोटस, थेल्स, अरस्तु और इरेटॉस्थनीज। यह काल 15वीं सदी के मध्य से शुरू होकर 18वीं सदी के पूर्व तक चला।

यह काल आरंभिक भूगोलवेत्ताओं की खोजों और अन्वेषणों द्वारा विश्व की भौतिक व सांस्कृतिक प्रकृति के बारे में वृहत ज्ञान प्रदान करता है।
17वीं सदी का प्रारंभिक काल नवीन ‘वैज्ञानिक भूगोल’ की शुरूआत का गवाह बना। कोलम्बस, वास्कोडिगामा, मैगलेन और थॉमस कुक इस काल के प्रमुख अन्वेषणकर्त्ता थे।
वारेनियस, कान्ट, हम्बोल्ट और रिटर इस काल के प्रमुख भूगोलवेत्ता थे। इन विद्वानों ने मानचित्रकला के विकास में योगदान दिया और नवीन स्थलों की खोज की, जिसके फलस्वरूप भूगोल एक वैज्ञानिक विषय के रूप में विकसित हुआ।
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