जिस दिन हमने अपनी सोच बड़ी कर ली साहेब, बड़े-बड़े लोग हमारे बारे में सोचना शुरू कर देंगे
मेरे दुश्मन भी मेरे मुरीद है शायद वक्त बेवक्त मेरा नाम लिया करते है मेरी गली से गुजरते है छुपा के खंजर रूबरू होने पर सलाम किया करते है|
हमारी हैसियत का अंदाज़ा तुम ये जान के लगा लो, हम कभी उनके नहीं होते जो हर किसी के हो गए।
हमें शायर समझ के यूँ नजर अंदाज मत करिये, नजर हम फेर ले तो हुस्न का बाजार गिर जायेगा।
