किसी ने क्या खूब लिखा है वक़्त निकालकर बाते कर लिया करो अपनों से अगर अपने ही न रहेंगे तो वक़्त का क्या करोगे
रहें दुरियाँ तो क्या हुआ, याद नज़रों से नहीं, दिल से किया जाता है !
बहुत दूर है तुम्हारे घर से हमारे घर का किनारा, पर हम हवा के हर झोंके से पूछ लेते है क्या हाल है तुम्हारा
मीलों का सफर एक पल में बर्बाद हो गया जब अपनों ने कहा कहो कैसे आना हुआ
जिंदगी ने पूछा सपना क्या होता है ? हकीकत बोली ... बंद आंखों में जो अपना होता है खुली आंखों में वही सपना होता है
ना चांद चाहिए ना फलक चाहिए, मुझे सिर्फ तुम्हारी झलक चाहिए !
